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Bhagavad Gita Shloka, Quotes

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เกี่ยวกับ Bhagavad Gita Shloka, Quotes

Bhagavad Gita Chapter, Shloka, Quotes - भगवद गीता के अध्याय, श्लोक

"When I read the Bhagavad-Gita and reflect about how God created this universe everything else seems so superfluous" - Albert Einstein

If you have ever wondered what makes Bhagavad Gita so special that scholars from all walks of life quote it and abide by it, you have come to the right place.

The Bhagavad Gita, spiritually known as the Divine Song, is an ancient Hindu scripture narrated by the Lord himself. As part of the Mahabharata, Bhagawad Gita contains a conversation between Arjuna and Krishna. Though the divine verses of Bhagavad Gita, Krishna makes us aware of the 5 basic truths of our existence - God, soul, time, karma and relationships. The Gita enlightens us by explaining the nature of consciousness, the self, and the universe.

As a true source of spiritual knowledge, Bhagavad Gita has been highly praised in the intellectual circle. It is considered among the most important texts in the history of literature, philosophy, and management. Speaking Tree brings you the old age wisdom of Gita right at your finger tips with this user-friendly App.

Special Features

1. Read all the verses as narrated by Lord Krishna in simple, understandable language.

2. You can also listen to the Shlokas by tapping on the play button, and Pause when you want.

3. After downloading the App, you don’t need Internet to access it. It is available offline.

4. The Prashnavali answers all your questions and predicts outcomes of your endeavors.

5. You can spread the wisdom by sharing quotes with your friends

Jai Sri Krishna!

श्रीमद्भगवद्‌गीता – संक्षिप्त परिचय

श्रीमद्भगवद्‌गीता संसार का प्रथम और समग्र मनस शास्त्र है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र की समरभूमि में उपदेशित इस शास्त्र में कुल अध्यायों की संख्या अट्ठारह है तथा कुल श्लोकों की संख्या लगभग सात सौ है। गीता का उल्लेख महाभारत के शांति पर्व में मिलता है। इसके संकलनकर्ता महर्षि वेदव्यास हैं।

क्यों कही गयी गीता?

जब रणक्षेत्र में अपने बंधु-बांधवों को अपने सामने देख गांडीवधारी अर्जुन शोकग्रस्त होकर नैराश्य की चरम सीमा पर पहुंच जाते हैं तब सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें पुनः कर्तव्ययुत करने हेतु गीता दर्शन का साक्षात्कार करवाते हैं। गीता में मनुष्य़ की सभी समस्याओं का समाधान मिल जाता है क्योंकि इसका सारभूत तत्व ही कर्ता विहीन कर्म है। गीता का आरंभ धर्म से तथा अंत कर्म से होता है। गीता मनुष्य को प्रेरणा देती है। मनुष्य का कर्तव्य क्या है? इसी का बोध करवाना गीता का लक्ष्य है।

श्रीमद्भगवद्‌गीता के सभी अट्ठारह अध्यायों के नाम अग्रलिखित प्रकार से हैं: 1. अर्जुनविषादयोग 2. सांख्ययोग 3. कर्मयोग 4. ज्ञानकर्मसंन्यासयोग 5. कर्मसंन्यासयोग 6. आत्मसंयमयोग 7. ज्ञानविज्ञानयोग 8. अक्षरब्रह्मयोग 9. राजविद्याराजगुह्ययोग 10. विभूतियोग 11. विश्वरूपदर्शनयोग 12. भक्तियोग 13. क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग 14. गुणत्रयविभागयोग 15. पुरुषोत्तमयोग 16. दैवासुरसम्पद्विभागयोग 17. श्रद्धात्रयविभागयोग 18. मोक्षसंन्यासयोग

गीता का उपदेश अत्यन्त पुरातन योग है। गीता की गणना विश्व के महानतम ग्रंथों में की जाती है। आदि शंकराचार्य से लेकर विनोबा भावे जैसे महान तपस्वी साधकों ने गीता के महत्व को बताया है। इसी गीता के आधार पर महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग का प्रतिपादन किया।

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